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ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस के फैन हुए कई देश, फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया भी खरीद सकता है भारतीय मिसाइल

On: November 27, 2025 3:15 PM
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Brahmos Missile: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान, हमने अपने रक्षा सहयोग और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक स्वतंत्र और स्पष्ट चर्चा की है.

फिलीपींस के बाद क्या अब इंडोनेशिया भी भारत से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस खरीदने जा रहा है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ ने भारत के दौरे पर आए इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सजफ्री सजमसोएद्दीन को ब्रह्मोस मिसाइल की ‘रेप्लिका’ उपहार स्वरूप दी है.

इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री सजमसोएद्दीन से हुई वार्ता के बाद प्रशंसा करते हुए राजनाथ सिंह ने गुरुवार (27 नवंबर, 2025) को कहा, ‘क्षेत्रीय सुरक्षा पर आधारित भारत और इंडोनेशिया का रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ गया है.’ रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आज विचार-विमर्श के दौरान, हमने अपने रक्षा सहयोग और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक स्वतंत्र और स्पष्ट चर्चा की.’

जानकारी के मुताबिक, इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल के सौदे के लिए भारत अपने ही किसी राष्ट्रीय बैंक से लोन भी देने के लिए तैयार हो गया है. माना जा रहा है कि इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का ये सौदा करीब 450 मिलियन डॉलर (करीब 3,877 करोड़ रुपये) का होने जा रहा है.

रूस के सहयोग से भारत ने देश में तैयार किया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

दुनिया की एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को भारत ने रूस की मदद से देश में ही तैयार किया है. ब्रह्मोस भारत का प्राइम स्ट्राइक वैपेन है, जिसे भारत की सबसे लंबी नदी ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को मिलाकर नाम दिया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल के एयर-वर्जन को पाकिस्तान के एयरबेस को तबाह करने के लिए सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया था.

दुनिया का कोई रडार ब्रह्मोस को नहीं कर सकता इंटरसेप्ट

माना जाता है कि दुनिया की कोई रडार, हथियार या फिर मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस को इंटरसेप्ट नहीं कर सकता है यानी एक बार ब्रह्मोस को दाग दिया तो ब्रह्मास्त्र की तरह इसे कोई नहीं रोक सकता है और अपने टारगेट को तबाह करके ही दम लेती है.

साउथ चाइना सी को लेकर इंडोनेशिया की चीन से चल रही तनातनी

साल 2023 में भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल के एंटी-शिप वर्जन की तीन बैटरियां निर्यात की थी. इस सौदे की कीमत करीब 2,700 करोड़ रुपये की थी. फिलीपींस ने अपने समुद्री-तट पर इन ब्रह्मोस मिसाइल को तैनात किया है.

दरअसल, फिलीपींस की तरह ही इंडोनेशिया की भी साउथ चाइना सी को लेकर चीन से तनातनी चल रही है. ऐसे में भारत से ब्रह्मोस मिसाइल का करार मायने रखता है. इसी वर्ष (2025 में) गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली आए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी के ऑफिस का दौरा भी किया था.

भारत की तीनों सेनाएं ब्रह्मोस मिसाइल का करती हैं इस्तेमाल

ब्रह्मोस मिसाइल भारत के उन चुनिंदा हथियारों (मिसाइलों) में से एक है, जिसे थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों ही इस्तेमाल करती हैं. वायुसेना के फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट, सुखोई में भी ब्रह्मोस मिसाइल को इंटीग्रेट कर दिया गया है.

थलसेना की आर्टलरी यानि तोपखाना भी ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल करता है. नौसेना के युद्धपोतों को भी ब्रह्मोस से लैस कर दिया गया है. जिससे नौसेना के शिप और अधिक घातक बन गए हैं और समंदर से जमीन तक पर टारगेट करने में सक्षम बन गए हैं.

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